Saturday, 22 December 2012

क्या पता कल हम ना होगें


 क्या पता कल हम ना होगें 

जी भर के सता लो 
ऐ दुनियांवालो 
क्या पता कल हम ना होगे ,
हवाएँ तो यही चलेगी 
पर शायद ऐसे मौसम ना होगे ,
रुलाते हो हमे 
तनहा समझ के 
पर कल तुम भी रोवोगे ,
जब रुलाने की खातिर हम ना होगे. 
माना की है ये जन्नत तुम्हारे ,
ये चाँद तुम्हारे, 
ये पारीयां तुम्हारी ...
पर गुनगुनावोगे मुझे भी कभी 
पास तुम्हारे जब हम ना होगें 
ये कैसी बेरुखी है हमसे ..
ऐ दुनियांवालो 
माना की मै कांटा ही सही ,
पर ढूँढोगे कभी ना कभी 
जब चुभेगा खार और 
निकालने की खातिर हम ना होगें ,
जी भर के सता लो 
ऐ दुनियांवालो 
क्या पता कल हम ना होगे ....
    ARBIND "ASHQ"

Friday, 21 December 2012

माँ तू कितना याद आती है .....

"ARBIND ASHQ"
 माँ तू कितना याद आती है

माँ तू कितना याद आती है 
जब दुनिंया के भीड़ से तनहा होता हूँ ...
जब अकेली रात में 
डर के सोता हूँ ...
माँ तू कितना याद आती है... 
जब कभी दिन भर की भाग दौड से थक के 
सोता हूँ 
जब कभी अपनी तन्हाईयों पे तनहा रोता हूँ
माँ तू कितना याद आती है... 
दुनियां के प्यार मुहब्बत के खेलो से 
जब दिल टूट जाता है 
दोस्ती के झमेलो से 
जब हर कोई पराया लगता है 
माँ तू कितना याद आती है...
                  -"ARBIND ASHQ"