क्या पता कल हम ना होगें
जी भर के सता लो
ऐ दुनियांवालो
क्या पता कल हम ना होगे ,
हवाएँ तो यही चलेगी
पर शायद ऐसे मौसम ना होगे ,
रुलाते हो हमे
तनहा समझ के
पर कल तुम भी रोवोगे ,
जब रुलाने की खातिर हम ना होगे.
माना की है ये जन्नत तुम्हारे ,
ये चाँद तुम्हारे,
ये पारीयां तुम्हारी ...
पर गुनगुनावोगे मुझे भी कभी
पास तुम्हारे जब हम ना होगें
ये कैसी बेरुखी है हमसे ..
ऐ दुनियांवालो
माना की मै कांटा ही सही ,
पर ढूँढोगे कभी ना कभी
जब चुभेगा खार और
निकालने की खातिर हम ना होगें ,
जी भर के सता लो
ऐ दुनियांवालो
क्या पता कल हम ना होगे ....
ARBIND "ASHQ"

