Friday, 22 March 2013

खुले आसमां मे..


 




खुले आसमां मे चमकने को 
तारें हजारो है ,

पर चाँद बिन सजती नहीं महफ़िल
सोती है दुनियां 

जब सुख की गहरी नीद में 
तनहइयो मे टूट के रोता है
मेरा दिल 




है किसकी कमी मालूम नहीं 


है कैसी खलिस मालूम नहीं 


है बस वीरानियो का बसेरा 





किससे करू हाले दिल बयान 


मतलबी दुनियां मे 


हम शायद किसी के काबिल नहीं...


                      -Arbind "ashq"

आसां क्यों नहीं ???


दर्दो को बया करना 
आसां क्यों  नहीं???
घुट-घुट कर जीना 
क्या यही जिंदगी है ???
रोता है दिल 
आंसुओ की आड़ में 
पर जिंदगी है की इम्तेहां का 
शैलाब लिये है 
फिरता हूँ  मारा -मारा 
चैनो शुकुन  की फिराक मे 
की कही तो जिंदगी को जिंदगी मिले ...
वक्त यूं ही गुजरता चला जा रहा 
और हम तन्हाइयों में खुद को 
मिटा रहे ....
हसरत तो कबकी खाक हो गयी ...
बस यादों का राख 
सिने पर पोत रखा  है.
               -अरबिंद "अश्क "