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| "ARBIND ASHQ" |
माँ तू कितना याद आती है
जब दुनिंया के भीड़ से तनहा होता हूँ ...
जब अकेली रात में
डर के सोता हूँ ...
माँ तू कितना याद आती है...
जब कभी दिन भर की भाग दौड से थक के
सोता हूँ
जब कभी अपनी तन्हाईयों पे तनहा रोता हूँ
माँ तू कितना याद आती है...
दुनियां के प्यार मुहब्बत के खेलो से
जब दिल टूट जाता है
दोस्ती के झमेलो से
जब हर कोई पराया लगता है
माँ तू कितना याद आती है...
-"ARBIND ASHQ"

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