कह दो उनसे मेरी उम्मीदों की दीवार अब टूटने को है
अब लूटनेवाले हर ईंट लूट जायेंगे,
गुनाह बस इतना था मेरा,
गैरों की एकाद ईंट को अपना समझ बैठा था
अब आये अपनी ईंट पहचान
वापस ले जाये
सब कुछ बिखर गया मेरा
बस ढ़ेर है ख्वाहिसो का
कह दो जयचंदो से
बुला लें मुहम्मद गौरी
चौहान निहत्था खड़ा है।।
21June 19
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