तनहा जीने की हसरत
तनहा जीने की हसरत
किसे होती है,
दोस्ती गमों से
दुश्मनी खुशियों से किसे होती है,
ये तो वक्त है जो देता है
सितम दर सितम
वरना
आंसू पीने की हसरत
किसे होती है ,
लाख मुद्दई सताये हमे
तो क्या
हम टकरायेगे यू ही
क्यों की
जब तक हो उम्मीद की एक किरण
तब तक
ना उम्मीदी की
रात नहीं होती ....
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