Friday, 22 March 2013

खुले आसमां मे..


 




खुले आसमां मे चमकने को 
तारें हजारो है ,

पर चाँद बिन सजती नहीं महफ़िल
सोती है दुनियां 

जब सुख की गहरी नीद में 
तनहइयो मे टूट के रोता है
मेरा दिल 




है किसकी कमी मालूम नहीं 


है कैसी खलिस मालूम नहीं 


है बस वीरानियो का बसेरा 





किससे करू हाले दिल बयान 


मतलबी दुनियां मे 


हम शायद किसी के काबिल नहीं...


                      -Arbind "ashq"

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