दर्दो को बया करना
आसां क्यों नहीं???
घुट-घुट कर जीना
क्या यही जिंदगी है ???
रोता है दिल
आंसुओ की आड़ में
पर जिंदगी है की इम्तेहां का
शैलाब लिये है
फिरता हूँ मारा -मारा
चैनो शुकुन की फिराक मे
की कही तो जिंदगी को जिंदगी मिले ...
वक्त यूं ही गुजरता चला जा रहा
और हम तन्हाइयों में खुद को
मिटा रहे ....
हसरत तो कबकी खाक हो गयी ...
बस यादों का राख
सिने पर पोत रखा है.
-अरबिंद "अश्क "
मिटा रहे ....
हसरत तो कबकी खाक हो गयी ...
बस यादों का राख
सिने पर पोत रखा है.
-अरबिंद "अश्क "
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