Tuesday, 2 December 2014

दिल ने जो चाहा..

दिल ने जो  चाहा 
वो मिला ना कभी,
जिसका डर था 
वही मिलता रहा,
हसरत थी की
चाहे कोई मुझे भी टूट के ,
पर तनहा तनहइयो 
में घुटता रहा,
जब रूठी हो किस्मत 
तो गैरों से कैसा शिकवा,
जमाने के बिछाये हर काँटों  पे 
आंखे मूंद चलता  रहा,
अब तो जैसे भी हो
जिते है हम,
मालूम है कि ज़हर है उसके बिन ज़िन्दगी 
फिर भी ज़हर घुट  के पीते है हम.
                        - अरबिन्द "अश्क "
                              जून २०१० 

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