Sunday, 4 November 2012

तनहा जीने की .....

तनहा जीने की हसरत

तनहा जीने की हसरत
किसे होती है,
दोस्ती गमों से
दुश्मनी खुशियों से किसे होती है,
ये तो वक्त है जो देता है
सितम दर सितम
वरना
आंसू पीने की हसरत
किसे होती है ,
लाख मुद्दई सताये हमे
तो क्या
हम टकरायेगे यू ही
क्यों की
जब तक हो उम्मीद की एक किरण
तब तक
ना उम्मीदी की
रात नहीं होती ....

Monday, 18 June 2012

मुहब्बत काँटों से







 हर मुस्कुराहट
अब तो वीरान हो गई,
जिंदगी हमारी
 बदनाम हो गई,
फूलों को छोड़के
कर गया मुहब्बत काँटों से,
काँटों से किसी को मिली
 कहाँ मुहब्बत,
अब तो उल्फत हमारी
सरेआम हो गई
चुभती रही सारी उम्र
उसकी बेवफ़ाई,
वफ़ा की उम्मीद में
सुबह से शाम हो गई....