क्या करते एतवार
हम दुनियां कि यारो ,
जिसे दिल से चाहा
वही दे गए आँखों में आंसू
हंसी जिसको दी
ख़ुशी जिसको दी
वही दे गए आँखों में आंसू
यूँ तनहा ही जी लेते तो अच्छा होता
संग जीने मरने किजिसने कसम थी खाई
वही दे गए आँखों में आंसू
है कितना खुदगर्ज
ये जमाना
देते थे जिसका साथ तन्हाई में
वही दे गए आँखों में आंसू
काश संभल जाता
ये पागल दिल हमारा
ना करता जुस्तजू किसी का
तो ना होता घायल दिल हमारा
टूटती ना हसरत
ना बहते इन आँखों से आंसू ....
-अरबिन्द "अश्क "
१७ जनवरी २०१०
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