हर मुस्कुराहट
अब तो वीरान हो गयी
जिंदगी हमारी
बदनाम हो गयी
फूलो को छोड़ के
कर गया मुहब्बत कांटो से
काँटों से किसी को मिली
कहां मुहब्बत
अब तो उल्फत हमारी
सरेआम हो गयी
चुभती रही सारी उम्र
उसकी बेवफाई
वफ़ा कि उम्मीद में
सुबह से शाम हो गयी .
-अरबिन्द "अश्क "
01 March 2010
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