Wednesday, 22 April 2015

हम इश्क का

हम इश्क का
हर इम्तिहान देगे

जो होगा मेरा रकीब
उसे भी दुवा देगे

पर दूर नहीं रह सकता
अपनी मुहब्बत से

हम काँटों पे भी चलेगे
लबो पे हंसी सजाके

पर हुवा जो वो दूर मुझसे

उसी वक़्त हम खुद को
मिटा देगे .
         -अरबिन्द "अंज "

हर मुस्कुराहट

हर मुस्कुराहट
अब तो वीरान हो गयी
जिंदगी हमारी
बदनाम हो गयी
फूलो को छोड़ के
कर गया मुहब्बत कांटो से
काँटों से किसी को मिली
कहां मुहब्बत
अब तो उल्फत हमारी
सरेआम हो गयी
चुभती रही सारी उम्र
उसकी बेवफाई
वफ़ा कि उम्मीद में
सुबह से शाम हो गयी .
        -अरबिन्द "अश्क "
         01 March 2010

वही दे गए आँखों में आंसू

क्या करते एतवार
हम दुनियां कि यारो ,
जिसे दिल से चाहा
वही दे गए आँखों में आंसू
हंसी जिसको दी
ख़ुशी जिसको दी
वही दे गए आँखों में आंसू
यूँ तनहा ही जी लेते तो अच्छा  होता
संग जीने मरने किजिसने कसम थी खाई
वही दे गए आँखों में आंसू
है कितना खुदगर्ज
ये जमाना
देते थे जिसका साथ तन्हाई में
वही दे गए आँखों में आंसू
काश संभल जाता
ये पागल दिल हमारा
ना करता जुस्तजू किसी का
तो ना होता घायल दिल हमारा
टूटती ना हसरत
ना बहते इन आँखों से आंसू ....
        -अरबिन्द "अश्क "
          १७ जनवरी २०१०

ऐ जिंदगी !

है रंग अनोखे तेरे
ऐ जिंदगी !
तू हंसाये भी
रुलाये भी
होके शोख चंचल
हंसी बनके आती है लबो पे
तो कभी खोमोशी
ऐ जिंदगी !
तू अपनाये भी
ठुकराए भी
पलभर में मिल जाये
दुनियां कि सारी ख़ुशी
तो पल भर में सरे ग़म
ऐ जिन्दगी !
तू जलाये भी
बुझाये भी
ना किसी का जोर
चलता है तुझ पे
तू अपनी मर्जी से
आये भी
जाये भी
है रंग अनोखे तेरे
ऐ जिन्दगी !
तू हंसाये भी
रुलाये भी .
-अरबिन्द "अश्क "
19 january 2010

सताती है जिंदगी

सताती है जिंदगी
सताते है लोग,
हंसाती है जिंदगी
तो सुर मिलाते है लोग,
बड़ी खुदगर्ज है ये दुनियां
दौलत पे बिकते है रिश्ते,
कही दौलत से दोस्त
तो कही हमराही भी बन जाते है लोग ,
ना हो दौलत तो बेकार है रिश्ते
बिन दौलत के बने रिश्ते भी
तोड़ जाते है लोग .
 
                -अरबिन्द "अश्क"
                   22 अप्रैल 2015

Tuesday, 2 December 2014

दिल ने जो चाहा..

दिल ने जो  चाहा 
वो मिला ना कभी,
जिसका डर था 
वही मिलता रहा,
हसरत थी की
चाहे कोई मुझे भी टूट के ,
पर तनहा तनहइयो 
में घुटता रहा,
जब रूठी हो किस्मत 
तो गैरों से कैसा शिकवा,
जमाने के बिछाये हर काँटों  पे 
आंखे मूंद चलता  रहा,
अब तो जैसे भी हो
जिते है हम,
मालूम है कि ज़हर है उसके बिन ज़िन्दगी 
फिर भी ज़हर घुट  के पीते है हम.
                        - अरबिन्द "अश्क "
                              जून २०१० 

Friday, 22 March 2013

खुले आसमां मे..


 




खुले आसमां मे चमकने को 
तारें हजारो है ,

पर चाँद बिन सजती नहीं महफ़िल
सोती है दुनियां 

जब सुख की गहरी नीद में 
तनहइयो मे टूट के रोता है
मेरा दिल 




है किसकी कमी मालूम नहीं 


है कैसी खलिस मालूम नहीं 


है बस वीरानियो का बसेरा 





किससे करू हाले दिल बयान 


मतलबी दुनियां मे 


हम शायद किसी के काबिल नहीं...


                      -Arbind "ashq"